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Friday, June 14, 2013

कुछ बाते,

शाम ढले कभी चेहरा तेरा नज़र आ जाए तो कुछ बात हो...
याद आए तेरी और तू बाहो मे आ जाए तो कुछ बात हो..
कट रहे है मिलन के इंतज़ार मे दिन मेरे सदियो के जैसे...
कभी ये मौसम कुछ लम्हो मे बीत जाए तो कुछ बात हो...




जो गुम गये शब्द मेरे तुझसे मुलाकात मे तो क्या..
शब्दो की मोहताज़ नही है मोहब्बत मेरी..
कुछ कहना थी जो इस दिल को उस दिल से...
तेरे चेहरे मे खोई मेरी आँखे ही काफ़ी है उस बात के लिए..

Wednesday, March 27, 2013

कुछ बाते,

जाने किसकी दुआ के असर से साथ मिला है तेरा मुझको... 
मुझे मेरी किस्मत पर इतना यकीन ना था और ना है.. 
बस मेरी इतनी सी इनायत है तुमसे कि..
जो थाम लिया है हाथ तो सफ़र मे साथ ना छूटने पाए..
रूठ जाए जो मौसम कभी.. प्यार की डोर ये ना टूटने पाए...





फ़ासले है लंबे इतने पर कर कुछ नही सकता.. 
हाँ प्रेम का ये दीपक अब बुझ नही सकता..
जिस दिन याद ना आए अपने महबूब की चाहत
उस दिन सांझ ढले सूरज छुप नही सकता...



तस्वीर तुम्हारी अब बाते कुछ करती है...
दिल के तन्हा कमरो मे रंग नये भारती है..
मीलो के जो फ़ासले है तेरे मेरे दरम्यान... 
रुसवा कर उन्हे सपनो मे रोज़ अब मुलाकात करती है...

कुछ अनकही बाते जो तुम्हारी आँखे कह गयी...
कुछ अरमानो की जूस्तजू तो बातो मे रह गयी.,..
मुलाक़ते तो हो जाएगी कभी फिर से...
आज के आलम तो ये मुलाकात अधूरी रह गयी

Thursday, January 31, 2013

कुछ बाते,


सीपियो मे था जब तक मोती था मैं...
बाहर निकल तो पत्थरो मे पहचान तलाशता मैं
खो गया है जो ज़माने की भीड़ मे...
अपनी हस्ती का वो निशान तलाशता मैं
बदल सकता तेरी मर्ज़ी काश ए खुदा..
हाथो के लकीरो के सहारे अपनी तकदीर ना छोड़ता..
आज इन लकीरो के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए..
अभिमन्यु सा एक धनुष बान तलाशता मैं...

Saturday, January 5, 2013

कुछ बाते


बूँदो को मैने भी बरसते देखा है...
धरती को मैने भी तरसते देखा है...
दिल से दिल लगा कर पूछ लेता है हाल कोई सिरफिरा...
यूँ जिंदगी को गमो मे मैने भी हंसते हुए देखा है...

अक्स जब कल का सोने नही देता...
साया भी खुद का जब रोने नही देता...
बिखर जाता है टूट कर कोई राही जब..
लहू लुहान उसे अकेले बिलखते हुए भी देखा है...

पर ये इस ज़िंदगी का अंजाम हो नही सकता...
एक कल के लिए दूसरे कल को खो नही सकता...
मैं तो कश्ती हूँ तूफ़ानो से लड़ने की पहचान है...
जानते है लोग मुझे फिर भी गुमशुदा ये अनजान है...

मैं तैरना भी जानता हूँ ओर डूबना भी...
निपुणता के कौशल से जनता हू जूझना भी..
आँधी सी चलती है जब यादो की बिखरेती सब कुछ..
जानता हूँ मिट्टी से ढके अंधेरे रास्तो को बुझना भी...


Wednesday, January 2, 2013

कुछ बाते,

कलम मोहताज़ नही होती ज़माने की अनुशंसा की..
अपने बूते कभी इतिहास ओर कभी भूगोल बदल दिया करती है...
चल पड़ती है जब ये मदमस्त हो कर गलियो से गुज़रती है..
आँखे मूंद ज़माने की रूह भी पीछे चल दिया करती है..

Wednesday, December 26, 2012

कुछ बाते


बदल जाती है इबादत इस ज़माने की बदलते मौसम के साथ..
कभी धूप कभी पानी कभी शीत हवाओ की आस लगाए मिलते है..
चंदन से लिपटा है नाग जैसे वो लिपटे अपने आपसे...
ज़िंदगी की इन रहो पर कितने ही गुमराह ठोकर खाए मिलते है..

दर्द बाँट कर खुशियाँ छानते... फरिश्ते है ऐसे भी..
कोई गली गली नमकीन पानी की मानो दुकान लगाए मिलते है..
सुखी आँखो की नज़र से बिलखती ज़िंदगी का लुत्फ़ उठता है कोई..
और कभी सागर के किनारे भी जल मे समाए लगते है..

मैं भी चल देता हू बंजारो की तरह सच की खोज मे..
ज़िंदगी की इन रहो पर कितने ही गुमराह ठोकर खाए मिलते है..

Monday, November 5, 2012

कुछ बाते


छुपा कर नो रखो आँखो को पलको के पीछे...
इन्ही से आज बात होने दो...
लब तुम्हारे बंद है कब से...
आज इनकी जूस्तजू मे रात होने दो...
दिल की इस सुखी बंजर ज़मीन पर...
इश्क़ वाली एक बरसात होने दो..
मिले है अजनबीयो की तरह हम कई बार..
आज मोहब्बतो वाली एक मुलाकात होने दो...

Thursday, October 11, 2012

कुछ बाते


कभी रास्तो पर जो मुलाकात हो जाए तुमसे...
नज़र मिला कर फिरा लेना अजनबी हो जैसे..
मेरी एकटक देखती आँखो के चुभते सवालो से..
कही खुद को तुम घायल ना कर लो..

Monday, September 17, 2012

कुछ बाते

1) 
जब नीली आँखो का सागर
खींचता अपनी ओर हर लहर के साथ... 
कदम जम जाते है ..
आख़िर कभी इनमे डूबने की चाह रखने वाला
आज काश्तियों के सहारे किनारे खोजा करता है...

2)
अजनबी है हसीन वादियाँ यहाँ यो
जो दिल खोल कर बात नही करती दो पल के लिए भी..
एक मिट्टी है मेरे देश की..
जहाँ पतझड़ भी हंसते हुए निकल जाता है,...

Wednesday, August 29, 2012

कुछ बाते


जलना है काम उसका.. वो दो पल की ज़िंदगी से ही खुश है..
सागर किनारे की तरह अपनी खामोशी मे ही खुश है..
गम नही की मिला ना साथ तेरा मेरी मंज़िल की राहो पर..
साथ बीते चाँद पॅलो की अंजान बंदगी से ही खुश है...

Wednesday, May 30, 2012

कुछ बाते

1) चल रही थी ज़िंदगी चंद बहानो से.. तुम मिले हो एक वजह बन कर.. सागर की लहरो के संग साहिल पर जैसे कुछ मोती आ गये हो.. ओर ज़िंदगी गुज़र जाएगी जैसे उन्हे समेटने.. बस दुआ कर अब रेत पर बैठे बैठे दूर छिपते सूरज को देखते हुए.. तेरे आगोश मे यूँही ज़िंदगी चलती रहे...




2) पलको के झरोखे से झाँकती वो नज़र.. धीरे से अपने मुखपृष्ठ का आकर्षण चुराते केसुओ को सुलझाती हुई वो.. धीमे धीमे मुस्कुराती है.. मानो एक भीगी सुबह में कोई कली पंखुड़िया फैला कर गुलाब बनी हो.. और मैं उलझ जाता हू एक प्रीत के पाश मे..


3) मेरी पलको पर सपने रख कोई मुझसे दूर जाकर बैठ गया है.. सपने है जो होश मे आने नही देते.. ओर एक चेहरा उनका जो कभी सोने नही देता..


4) बरसो से जिसका इंतज़ार किया है.. वो सामने है मेरे.. बस छूने से डर लग रहा है.. कि कहीं कोई सपना बन बिखर ना जाए.. अब यकीन तुझे ही दिलाना होगा मीत मेरे.. कि सामने जो हो मेरे.. वो तुम ही हो.. तुम्हारा कोई अक्स नही..


5) यकीन आता नही है पल पल बदलते मौसम की मिज़ाज़ पर.. दिल मे उतरते किसी अहसास पर... ये लम्हे कुछ है जाने पहचाने.. पहले सुन चुका हू ये अफ़साने.. हक़ीकत है मैं यकीन करना नही चाहता... क्योंकि जूठे सपनो से सच के दर्द कहीं ज़्यादा सुकून दे रहे है..


6) चेहरा बदल सामने आए है वो.. बरकत हुई है मेरे नसीब की..
खुली जुल्फे उनकी मदहोश कर रही है क़ि.. सपना है या हक़ीकत.. फ़र्क करना मुश्किल है अब...
जाग रहा हू बंद पलको के पीछे .. आँखे खोल मैं अब सो रहा हू..
डूब रहा हू उनकी आँखो मैं हर पल.. आगोश मे उनके खो रहा हू..



7) दुआ कर रहा है तू कि एक मुलाकात काश उनसे हो जाए.. ,, पर कुछ ख्यालो में ही गुमशुदा है अब तक.. .. चाहत रखी है जैसे क्षितिज को छूने की साहिल पर खड़े रहकर... दुआ भी कैसे रंग लाएगी बता मुझे तू ये.. जब तुझे अब तक डर लगता है तूफ़ानी लहरो का... तेरी कश्ती तो डूब चुकी है कब की.. अब मुलाकात करनी है तो तूफ़ानो को तो चीरना ही होगा.,,


8) क्यों आज यूँ बेचैन है तू.. जब गिरा है ज़मीन पर एक आसमान से... उँचाइयो की आदत होती है गिराना गर्त की गहराइओ में. पर तू ही तो था जिसने आसमानो से दोस्ती की थी ज़मीन को गैर बना कर... मत भूल तू अहसान ज़मीन का.. आख़िर इसी के आँचल मे तूने आँखे खोली थी ओर इसी के आँचल मे तुझे सो जाना है


9)  हाथो मे हाथ थामने के बहाने से... मत रोक मुझे उड़ान भरने से.. तू वक़्त है कोई ठहरा हुआ.. ओर मंज़िल मेरी अभी एक अनसुलझी पहेली है... सूरज की तपिश मे अभी मुझे जलना है... बदलो पर अभी मुझे चलना है.. मुझे अभी बहुत दूर तक उड़ना है...


10) एक याद जब कभी नींद से जगा देती है.. गहरी रात के अंधेरो मे कांप उठता हूँ तन्हाई से.. विचलित मन को समझाता हूँ.. और फिर खो जाता हू.. एक गहरी नीद मे.. जहाँ कोई सपना नही.. बस फैला है तो अंधकार अनंत तक ,, बस उसी अंधकार का प्रकाश हो तुम.. एक अहसास हो तुम...कुछ खास हो तुम,,,

Monday, May 28, 2012

कुछ बाते

लम्हो से मुलाकात होती है अक्सर जब.. ठहर कर सवाल पूछता हूँ उनसे.. क्या वापिस फिर साथ चलोगे हाथो मे हाथ डालकर.. मुस्कुरा कर लम्हे मुझसे ये कहते है.... यादे बन तेरे दिल के किसी कोने मे हम रहते है... तू खोजता हमें इस ज़माने की भीड़ मे.. हम अक्सर तन्हाइओ की हवा संग बहते है..

Sunday, May 27, 2012

कुछ बाते

मुलाक़ातो की इस खुशनुमा दौर से डर लगने लगा है अब .. ऐसा ना हो कहीं कि मैं समझ रहा जिसे व्योम .. और वो सिर्फ़ एक धुआँ हो.. जिसे समझ रहा हूँ गहरा सागर प्रेम का.. वो कहीं सूखा हुआ कुआँ हो.. परदा है कोई खूबसूरत इन आँखो पर या किसी कहानी की शुरूवात है.. इतना सोचता हूँ जाने क्यों.. अजनबी ये मुलाकात है..