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Sunday, December 11, 2011

यू तो कोई गम नही है

तुम नही हो यू तो कोई गम नही है
पर जो थे हम अब वो हम नही है..


उड़ रहे हो तुम अपने प्यार की वादियो मे
ओर मेरे पँखो मे अब कोई दम नही है..

आता नज़र चेहरा मेरे मुस्कुराता हुआ
पर गहराई मेरे दर्द की कम नही है..


गुजर रहा है सफ़र ज़माने की भीड़ मे
पर भरते तन्हाई के जख्म नही है..

लिखता है नजमे आज भी अंजान यू तो..
लिख दे कहानी तेरी जो वो अब कलम नही है

तुम नही हो यू तो कोई गम नही है
पर जो थे हम अब वो हम नही है..

Saturday, December 10, 2011

मोहब्बत बंजारो से

ना करना बंजारो से मोहब्बत ..
पिघलते देखा है पत्थर को अंगरो मे..


बुनते ख्वाब दिल की आवाज़ से..
जूझते देखा उनको तन्हाई के अँधियारो मे..


चले तैरने इस अजनबी समंदर मे
डूबते देखा उनको उफनती मझधारो माए

लगाई चिंगारी प्यार की दिल से
काँपते देखा उनको अक्सर ठंडे जाड़ो मे


लगाया है नकाब खुशियो का पर..
ठहराते देखा एक आँसू आँखो के किनारो मे..

--
अंजान

Tuesday, December 6, 2011

मूरत


ज़िंदगी ऐसे मैं बिता रहा हू..
पत्‍थर मे मूरत तेरी बना रहा हू..


पैगाम आया तेरा जो मेरे लिए
वो हर एक को मैं अब सुना रहा हू...


दर्द जो तुमने दिया प्यार की राहो पर..
नीलाम उसको अब मैं करवा रहा हू..


मोहब्बत है सफ़र कांटो का..
दास्तान ए इश्क़ मैं अब बता रहा हू..


लफ़ज़ो मैं लिखा थी जो अब तक..
वो गीत सुबको अब सुना रहा हू..


ज़िंदगी ऐसे मैं बिता रहा हू..
पत्‍थर मे मूरत तेरी बना रहा हू.